महिला आरक्षक से हुई बदसलूकी का वीडियो 5 दिन बाद क्यों हुआ वायरल, कहीं मामला उलझाने का प्रयास तो नही, आखिर कौन है इसके पीछे….?

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रायगढ़। रायगढ़ जिले के लैलूंगा विधानसभा में आने वाले तमनार ब्लाक में बीते 27 दिसंबर को हुई हिंसा, आगजनी, व पुलिस अधिकारियों के साथ मारपीट के साथ-साथ उसी दिन एक महिला सिपाही के साथ बर्बरता हुई थी लेकिन मीडिया से लेकर सभी चैनलों ने इस मामले को उस वक्त न तो जाना था और ना ही ऐसा कोई वीडियो वायरल हुआ था। अचानक 27 दिसंबर के बाद नये साल के दिन अचानक चर्चा में आ गया। जानकार सूत्र बताते हैं कि इस वीडियो को जान बुझकर वायरल कराते हुए पूरे आंदोलनकारियों को घेरना और साथ ही साथ इस कोल ब्लाक संबंधी जन सुनवाई को दूसरा रूप देना था।
अधिकारिक सूत्र काकाजी डाॅट काम को बताते हैं कि 27 दिसंबर को हुई हिंसा की खबर में बहुत कुछ समाचार पत्रों में और टीवी चैनलों में कव्हरेज किया गया था, साथ ही साथ पूरी तत्परता के साथ जानकारी दी गई थी कि कैसे पुलिस व आंदोलनकारियों के बीच झडप में आधे दर्जन से अधिक गाडियों को आग के हवाले कर दिया गया। साथ ही साथ तमनार थाना प्रभारी के अलावा, एसडीओपी सहित कई पुलिस कर्मियों को चोटे भी आने के समाचार मिले थे। उस दिन भी महिला आरक्षक के साथ उसके कपड़े फाड कर की गई बदसलूकी का जिक्र करने वाला वीडियो दूर-दूर तक किसी भी मीडिया कर्मी के पास नही था और अब अचानक 1 जनवरी को सुबह से यह बात आग की तरह ऐसी फैली की एक के बाद एक मीडिया इस मामले में अपनी खबर को चलाने के लिये पुलिस अधिकारियों से बयान लेने के लिये जुट जाती है और इसी बीच कुछ सोशल मीडिया इस वीडियो को अतिरंजित करते हुए अपने-अपने प्लेटफार्म में चलाकर इस कृत्य को बर्बरता से जोड़ते हैं। जबकि सूत्र बताते हैं कि यह वीडियो जब 27 दिसंबर को बनाया गया था तब यह किसी के हाथ क्यों नही लगा।
एक जानकारी यह भी है कि जेपीएल को आबंटित गारे पेलमा गोल ब्लाक सेक्टर वन की जनसुनवाई 8 दिसंबर को होनें के बाद आंदोलनकारी लगातार इसका विरोध कर रहे थे और अचानक 27 दिसंबर को घटना नया रूप ले लेती है और यहां प्रशासन बैक फुट में चला जाता है। यहां यह बताना लाजमी होगा कि इसी दिन को लेकर जिला प्रशासन लैलूंगा विधायक विद्यावती सिदार सहित आंदोलनकारियों से बातचीत करके इसे शांत कराने का प्रयास करता है और उन्हें जन सुनवाई को रद्द करने संबंधी प्रस्ताव तक रखना पड़ता है। अब यह समझ से परे है कि जब आंदोलन समाप्त हो चुका था और चर्चा में यह बात सामने आ गई थी कि जो जनसुनवाई 8 दिसंबर को हुई थी उसे रद्द करने की प्रक्रिया संबंधी पत्र जिला कलेक्टर शुरू कर रहे हैं इतना ही नही जिंदल उद्योग के अधिकारी ने सार्वजनिक रूप से इसकी घोषणा की थी तब महिला के साथ हुए बर्बरता व निंदनीय दुव्र्यवहार वाला वीडियो अचानक क्यों लाया गया था।
अब देखना यह है कि अचानक महिला आरक्षक के साथ हुई बदसलूकी के वीडियो से बदले माहौल का फायदा कौन उठाता है और आखिर इस वीडियो को बांटने वाले और पत्रकारों को बुला-बुलाकर इसे अपने-अपने हिसाब से प्रसारित करने के पीछे किसका दिमाग था और क्या मंशा थी।

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Author: Samachar Doot

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